Best 15 Vastu Tips For Good Health | ये 15 वास्तु टिप्स जो दिलाएंगी हर रोग से मुक्ति |

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Vastu Tips

Amazing Vastu Tips – कहा जाता है कि “स्वस्थ तन में ही स्वस्थ मन का निवास होता है” इसी के आधार पर हमारे जीवन की कार्य शैली तथा जीवन संबंधी आचार विचार निर्भर करते हैं। जब हम बीमार होते हैं तो अच्छे चिकित्सक के पास जाते हैं और वहां पर अपना इलाज करवाते हैं परंतु यह जरूरी नहीं है कि हर बीमारी का इलाज चिकित्सक के पास हो। यदि कुछ चीजों को हम अपने जीवन में अपनाएं तो हम स्वस्थ रह सकते हैं। इसके लिए अपने जीवन शैली में थोड़ा सुधार लाने की जरूरत होती है।

यदि हम वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra) के कुछ आधारभूत नियमों का पालन करें, तो निश्चित रूप से हम अपने परिवार और स्वयं को स्वस्थ रखने में कामयाब हो पाएंगे। वास्तु शास्त्र को यदि हम आधारभूत विज्ञान या परंपरा माने तो कोई गलत नहीं होगा, क्योंकि हमारे पूर्वज में भी वास्तु का इस्तेमाल करके अपने परिवार और स्वयं को लंबा जीवन प्रदान किया है। इसके साथ ही उन्होंने स्वस्थ तन में स्वस्थ मन को भी बताया है।

आज हम इस लेख में आपको वास्तु शास्त्र के बारे में कुछ जानकारी प्रदान करेंगे। हम यह भी बताएंगे कि किन-किन उपायों को अपनाकर हम स्वस्थ रह सकते हैं।

15 Vastu Tips for Good Health| 15 वास्तु टिप्स स्वस्थ्य जीवन के लिए

1.

दोपहर के समय सूर्य से अल्ट्रावायलेट किरणें निकलती है, जो हमारे सेहत के लिए बहुत हानिकारक होती हैं। इससे बचने के लिए सुबह 11:00 बजे के बाद घर की दक्षिण दिशा में स्थित खिड़कियां तथा दरवाजे बंद कर देना चाहिए, क्योंकि वास्तु में यह किरणें शरीर के लिए हानिकारक मानी गई है।

2.सुबह के समय सूरज की किरण यदि हमारे शरीर पर पड़ती है,तो वह हमारे लिए अत्यधिक लाभदायक होती है। इससे शरीर के हानिकारक बैक्टीरिया नष्ट हो जाते हैं। हमें सुबह उठकर पूर्व दिशा की सारी खिड़कियां और दरवाजे खोल देना चाहिए, ऐसा करने से सूर्य देव का आशीर्वाद भी मिलता है।

3. यदि घर का मुख्य द्वार पश्चिम या दक्षिण – पश्चिम अथवा नेश्रात्य कोण की ओर होता है,तो यह अत्यधिक रोगकारक और अशुभ माना जाता है, क्योंकि यहां से आने वाली प्रकाश की किरण और हवा मलिन होती है, इसीलिए इससे हमें बचना चाहिए।

4. यदि पूर्व दिशा में दीवार की ऊंचाई अधिक होती है,तो वह वह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है और इसके विपरीत दक्षिण दिशा में ऊंची दीवार रोगों का नाश करने के लिए महत्वपूर्ण साबित होती है, इसीलिए हमेशा घर के दक्षिण दिशा में ऊंची दीवार रखना चाहिए। पूर्व दिशा को अत्यधिक शुभकारी माना गया है और दक्षिण दिशा को अशुभकारी माना गया है।

5.यदि घर की गैलरी पश्चिम दिशा की ओर होती है तो उस घर के पुरुषों का स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता है।वह हमेशा बीमार ही रहते हैं और उनका कामकाजमें भी अच्छे से मन नहीं लगता है।वास्तु टिप्स (vastu tips) के अनुसार इससे बचाव के लिए हमें अपने घर के उत्तर दिशा की ओर गैलरी बनाना चाहिए, इससे रोगों से बचाव होता है।

6.

गर्भवती महिलाओं को हमेशा दक्षिण – पश्चिम दिशा में स्थित कमरों में ही रखना चाहिए। ऐसी अवस्था में ईशान कोण अथवा अग्नि दिशा में सोने वाला कमरा नहीं रखना चाहिए, क्योंकि इससे गर्भाशय संबंधित समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसी प्रकार नवजात शिशुओं के लिए घर के पूर्व तथा पूर्वोत्तर के कमरे स्वास्थ्य के लिए लाभकारी साबित होते हैं और बच्चों को हमेशा सोते समय सिर पूरब दिशा की ओर रखना चाहिए, इससे बच्चे स्वस्थ रहते हैं।

7.एक महत्वपूर्ण वास्तु टिप्स (vastu tips) ये भी है कि सोने वाला रूम हमेशा खुला और हवादार होना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इससे मानसिक तनाव और नर्वस सिस्टम संबंधी बीमारियां नहीं होती है। इसके साथ ही ब्लड प्रेशर भी सुचारु रुप से बना रहता है, यदि ब्लड प्रेशर के मरीजों को दक्षिणा-पूरब में स्थित कमरों में नहीं रखना चाहिए, क्योंकि यह दिशा अग्नि तत्व के प्रभाव में रहती है और यहां पर रहने से ब्लडप्रेशरऔर बढ़ सकता है।

8. उत्तर दिशा में सिर रखकर सोने से धरती का उत्तरी ध्रुव और मनुष्य का सिर आपस में विकसित हो जाता है। जिससे अनिद्रा अथवा नींद ना आने वाला रोग उत्पन्न हो जाता है और शरीर धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है। यदि मनुष्य दक्षिण में मस्तक रखकर सोता है, तो चुंबकीय आकर्षण से शरीर में किसी प्रकार का द्वेष अथवा रोग उत्पन्न नहीं होता है।

9. पूजा घर में यदि खंडित मूर्ति या फोटो लगाने से स्वास्थ्य संबंधी परेशानी उत्पन्न हो सकती है। यदि घर में खंडित या टूटी हुई मूर्ति है, तो उसे नदी में विसर्जित कर देना चाहिए। हमेशा दक्षिण की दीवार में पित्र की तस्वीर या पंचमुखी बालाजी की फोटो लगाना चाहिए। जब भी घर का कोई भी सदस्य पूजा करता है तो उसे इस बात का ध्यान रखना होगा कि उनका बैठने का तरीका अच्छा होना चाहिए। उसे  भगवान के सम्मुख बैठना चाहिए और पूरे मन से पूजा करनी चाहिए।

10.

ईशान कोण में यदि तुलसी का पौधा लगाते हैं, तो घर की स्त्रियों का स्वास्थ्य कभी ठीक नहीं रहता है। वह हमेशा बीमार ही रहती है और इससे घर की सुख शांति भी नष्ट हो जाती है, इसीलिए हमेशा तुलसी को पश्चिम दिशा में ही लगाना चाहिए, जिससे किघरकीस्त्रियांहमेशा स्वस्थ रहें और घर की शांति बनी रहे।

11. यदि कोई व्यक्ति घर में तहखाना बनाना चाहता है तो उन्हें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि,पश्चिमदिशा में कभी भी नहीं बनाना चाहिए। इससे कभी भी विपदा आने की संभावना रहती है, इसलिए हमेशा उत्तर दिशा में ही तहखाना बनाना चाहिए।

12. जब कोई भी व्यक्ति घर बनाता है तो उसे इस बात का ध्यान रखना चाहिए, कि घर में एक छोटा सा कोना कच्चा या मिट्टी युक्त बनाना चाहिए।इससे शुक्र ग्रह का अच्छा प्रभाव बना रहता है और घर में हमेशा सुख समृद्धि बनी रहती है। इसके वजह से स्त्रियों को हमेशा स्वास्थ्य संबंधी विकार उत्पन्न नहीं होते हैं और घर में लक्ष्मी प्राप्ति होते रहती है। इसके साथ ही घर के सभी दरवाजे अंदर की तरफ खुलने चाहिए।

13.

वास्तु शास्त्र में ऐसा माना जाता है कि यदि घर के दीवारों पर दरार और सीलन होती है तो ऐसी स्थिति नकारात्मक स्थिति पैदा करती है। जिससे घर में अशांति बनी रहती है। सीलन भरे स्थानों पर अधिक समय तक रहने से  श्वसन संबंधी समस्याएं उत्पन्न होती है। इसके साथ ही त्वचा संबंधी समस्याएं भी उत्पन्न होती है। परिवार के बुजुर्ग सदस्यों को हमेशा दक्षिण पश्चिम दिशा में स्थित कमरे में ही रखना चाहिए। यह उनके लिए अच्छा माना जाता है और उनका स्वास्थ्य हमेशा अच्छा बना रहता है।

14. वास्तु शास्त्र में पूरब दिशा को अत्यधिक शुभ माना गया है। यदि रसोईघर में जिस गैस स्टोव पर खाना बनाया जाता है, उसे इस तरह से व्यवस्थित करना चाहिए कि खाना बनाते वक्त आप का मुख पूर्व दिशा की ओर होनी चाहिए। यदि खाना बनाते समय महिलाओं का मुख उत्तर दिशा की ओर होता है, तो उन्हें थायराइड जैसी बीमारी गिर सकती है। इसके साथ ही यदि दक्षिण दिशा की ओर मुख करके खाना बनाया जाता है, तो ग्रहणी के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

15. हमारे वास्तु शास्त्र में ऐसा माना जाता हैकि भोजन करते समय मुख हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। ऐसा करने से हमारी सेहत अच्छी बनी रहती है। यदि कोई व्यक्ति भोजन करते वक्त दक्षिण दिशा की ओर मुख करके भोजन करता है। इसको वास्तु में इसे वर्जित माना गया है तथा पश्चिम दिशा की ओर भोजन करने से रोगों में वृद्धि होने की संभावना रहती है।

आशा करता हूं मेरे द्वारा दी गई इन वास्तु टिप्स (vastu tips) से आप संतुष्ट होंगे। इस लेख का उद्देश्य वास्तु शास्त्र के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी प्रदान करना है। इसके साथ ही यदि हम वास्तु शास्त्र के नियमों को अपने जीवन में अपनाते हैं तो उनका लाभ किस तरह से हमारे लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं।

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