क्यों माना गया है स्वस्तिक का चिन्ह इतना शुभ और क्यों इसको करते है प्रतिष्ठित हर शुभ कार्य के पहले

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आचार्य यास्क के अनुसार स्वस्तिक को अविनाशी ब्रम्हा की संज्ञा दी गई है | इसे श्री ( धन की देवी लक्ष्मी ) का प्रतीक चिन्ह भी माना जाता है |

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ऋग्वेद में स्वस्तिक को सूर्य का प्रतीक माना गया है, जबकि अमरकोश में इसे आशिर्वाद, पुण्य, क्षेम और मंगल का पर्याय माना गया है |

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स्वस्तिक का एक नाम “सतिया” भी है | सतिया को सुदर्शन चक्र का प्रतीक भी माना गया है | यह गणितीय परिकलन के धनात्मक चिन्ह (+) को भी प्रगत करता है, जो सम्पन्नता और सुख-समृद्धि का भी प्रतीक है |

swastika-symbol-benefitsशास्त्रों के अनुसार स्वस्तिक की आठ भुजाएं प्रथ्वी, अग्नि, जल, वायु, आकाश और मस्तिष्क भाव आदि की प्रतीक मानी जाती है | मुक्य्तः चार भुजाएं चार दिशाओं (पूर्व, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण), चार युगों (सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग और कलियुग), चार वर्णों (ब्राम्हण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र), चार आश्रमों (धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष), ब्रह्मा जी के चार हाथो और चार मुखों, चार वेदों ( ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद) और चार नक्षत्रों (पुष्य, चित्रा, श्रवण और रेवती) आदि का प्रतीक माना जाता है | इस प्रकार स्वस्तिक चिन्ह को इन सभी की कृपा और आशिर्वाद पाने का मार्ग और कल्याण का प्रतीक माना जाता है |

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