Prahlad Jani – एक चमत्कारी सिद्ध योगी जो आज भी विज्ञान के लिए एक शोध है

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Yogi Prahlad Jani Vs Science | योगी प्रहलाद जानी

Prahlad Jani – भारतीय सभ्यता एक प्राचीन सभ्यता है, जिस का इतिहास बहुत जागरूक और आश्चर्यचकित कर देने वाला है। भारत में न जाने ऐसे कितने लोग हैं जिन्होंने भारतीय इतिहास में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करवाया है। भारतीय सभ्यता की जितनी बात करें उतना कम है क्योंकि भारत की आज भी परंपरा और शिक्षा हमें मार्गदर्शन देने का कार्य करती है। हमारे देश का योग और साधना देश दुनिया में प्रसिद्ध है। हमारे पूर्वजों ने ध्यान करके जो शक्तियां अर्जित की है, वह आज भी वैज्ञानिकों के लिए शोध तथा अनुसंधान का विषय बना हुआ है।

आधुनिक दुनिया की बात करें तो वैज्ञानिकों ने बहुत से अविष्कार करके दुनिया को एक नई ऊंचाई की ओर ले गए परंतु वैज्ञानिकों के दिमाग में आज भी एक सवाल है कि भारतीय लोग कैसे ध्यान और साधना करके अपने आप को लंबी आयु देते हैं। भारत में ऐसे ही एक व्यक्ति थे जो लगभग 8 दशक से बिना खाए और पिए अपना जीवन यापन कर रहे थे, उनका नाम प्रल्हाद जानी है।

क्या मेडिटेशन से बिना खाए – पिए जीवित रहा जा सकता है, इन्हीं कुछ सवालों के साथ आज हम इस लेख में आपको प्रल्हाद जानी जिन्हें लोग चुंडी वाले माताजी के नाम से भी जानते हैं, उनके बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी देंगे तथा हम यह भी बताएंगे कि उन्होंने कैसे वे 79 साल बिना खाना पानी के 91 वर्ष तक जीवित रहे।

About Prahlad Jani | सामान्य परिचय

प्रल्हाद जानी (Prahlad Jani) का जन्म 13 अगस्त 1929 को चरादा गांव मेहसाणा जिला गुजरात में हुआ था। प्रहलाद जानी के अनुसार उन्होंने 7 साल की उम्र में ही अपना घर छोड़ दिया था और वह जंगल में रहने चले गए। जब वह 12 साल की उम्र में थे तब उन्हें आध्यात्मिकता का अनुभव हुआ। वह हिंदू धर्म की देवी अंबा के पुजारी तथा अनुयाई बन गए। प्रल्हाद जानी कक्षा तीन तक पढ़े हैं परंतु उनका मन पढ़ाई में नहीं लगता था। उन्हें भगवान की पूजा आराधना करना अच्छा लगता था इसीलिए वह केवल 12 साल की उम्र में ही अपने कंधे पर लाल रंग की साड़ी और आभूषण पहनने लगे थे।

प्रल्हाद जानी चर्चा का विषय | Why Pralhad Jani is a matter of discussion

1970 के दशक में प्रल्हाद जानी गुजरात के जंगलों में चले गए और वहां पर स्थित एक गुफा में रहने लगे। उनका कहना था कि उन पर देवी अंबा का आशीर्वाद है। उन्हें देवी अंबा के आशीर्वाद से ही जीवनदान मिला है। वह केवल हवा पर ही जीवित रहते थे। जब यह बात लोगों के सामने आई तो यह एक वैज्ञानिकों के लिए शोध का विषय बन गया। प्रहलाद जानी 79 साल से कुछ भी नहीं खाए थे, फिर भी इतने लंबे समय तक कैसे जीवित रह गए। वैज्ञानिक निरंतर जांच के लिए उनसे मिलते रहे। जब उनसे पूछा गया कि आप कैसे जीवित रहते हैं तो उन्होंने कहा की माताजी ने मुझे जीवित रखा है। उनकी मृत्यु  26 मई 2020 को हो गई, तब उनकी उम्र 91 वर्ष थी। इतना लंबा समय बिना कुछ खाए पिए जीवित रहना वैज्ञानिकों को असंभव लगता था।

वैज्ञानिकों का मानना |

वैज्ञानिकों और डॉक्टरों की टीम ने इस बात को नकार दिया कि कोई व्यक्ति बिना खाए पिए इतने लंबे समय तक कैसे जीवित रह सकता है। यह विज्ञान के दायरे में नहीं आता है। डॉक्टरों का मानना है कि कोई भी वयस्क व्यक्ति बिना खाए केवल 30 से 40 दिन तक ही जीवित रह सकता है लेकिन बिना पानी के केवल 5 दिन से ज्यादा जिंदा नहीं रह सकता है, यह असंभव है। उन्होंने उदाहरण देते हुए भी कहा कि 1981 में उत्तरी आयरलैंड में कैदियों ने भूख हड़ताल कर दी थी। जिसमें 10 कैदियों की मृत्यु हो गई थी, उनमें से केवल एक ही व्यक्ति 73 दिनों तक बिना खाए पिए जीवित रह पाया था परंतु कोई भी व्यक्ति 79 साल तक बिना खाए पिए नहीं रह सकता है। यह पहली विज्ञान और अध्यात्म के बीच में उलझी हुई है।

प्रल्हाद जानी पर वैज्ञानिक रिसर्च | Scientific Reasearch on Baba Prahlad Jani

Baba Prahlad Jani

भारतीय डॉक्टर ने 2003 और 2015 में प्रल्हाद जानी पर अनुसंधान कार्य चालू कर दिया था । उन पर किए गए कुछ जांचों के अनुसार अहमदाबाद के न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर सुधीर शाह ने कहा कि उनका कोई शारीरिक ट्रांसफॉरमेशन हुआ है। वह जाने अनजाने में बाहर की शक्तियां प्राप्त कर रहे हैं। उन्हें जीवित रहने के लिए कैलोरी की आवश्यकता नहीं पड़ रही है। हमने उन पर कई दिनों तक अवलोकन किया उनका एक एक सेकंड का वीडियो भी बनाया उन पर 15 दिन तक सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से निगरानी भी रखें परंतु उन्होंने कुछ खाया और पिया भी नहीं।

क्या थी डाक्टर की राय ?

डॉक्टर सुधीर शाह ने यह भी बताया कि पहली बार जानी जी को मुंबई के जे.जे. अस्पताल में परीक्षण करने के लिए भर्ती किया गया था। तब वहां से पता चला कि उनकी शारीरिक क्रियाएं सामान्य रूप से चल रही है। उन्हें किसी भी प्रकार की बीमारी नहीं है इसके बाद सीनियर चिकित्सक डॉ धुर्वे ने बताया कि उनका शरीर पूरी तरह से स्वस्थ है। उनकी किसी भी कोशिका में चर्बी का कोई अंश नहीं है परंतु इसे दैवीय कृपा नहीं माना जा सकता उनके शरीर में ऊर्जा का अतिरिक्त कोई ना कोई स्रोत जरूर होगा। आपको बता दें कि वैज्ञानिक अभी भी इसे करिश्मा कहने से बच रहे हैं।

22 अप्रैल 2011 को रक्षा शोध और विकास संगठन यानी DRDO ने उन पर जांच प्रक्रिया अपनाएं 30 डॉक्टर की एक टीम ने तरह-तरह के परीक्षण किए उनकी हृदय और मस्तिष्क क्रियाओं को भी मापा, मैग्नेटिक इमेजिंग मशीन से भी स्कैनिंग की गई। उनके पेशाब और शौचालय का भी परीक्षण किया गया परंतु वह सचमुच बिना खाए और पिए जिंदा रहते थे। वह पूरी तरह से स्वस्थ थे उन पर 24 घंटे दो वीडियो कैमरों के माध्यम से नजर रखी जाती थी परंतु किसी भी वीडियो में कोई खुलासा नहीं हुआ।

चुंडी वाले माताजी को श्रद्धांजलि | Prahlad Jani Death

प्रल्हाद जानी का निधन 91 वर्ष की आयु में हुआ, 26 मई 2020 को मंगलवार के दिन उनका निधन हो गया। इसी बीच गुजरात के कानून और शिक्षा मंत्री श्री भूपेंद्र सिंह ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए ट्विटर पर लिखा कि “1929 में पैदा होने के बाद सिर्फ 12 साल की उम्र में माताजी ने खाना पीना छोड़ दिया था” श्री भूपेंद्र सिंह माता जी से मिलने अंबाजी स्थित उनके आश्रम गए थे ।

डॉक्टर और वैज्ञानिकों के लिए चुनौती |Why Mystery of Yogi Prahlad Jani is Challenge for doctors and scientists

प्रल्हाद जानी विज्ञान के लिए एक चुनौती है ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं है जो इतने लंबे समय तक बिना खाए पिए रह सकता हो। उन्होंने इतने साल एकांतवास में रहकर अपने रहस्य को आज भी चर्चा का विषय बना कर रखा है। उनकी मृत्यु के बाद भी वैज्ञानिक इस तर्क वितर्क में लगे हैं कि क्या आज भी विज्ञान अध्यात्म के सवालों को ढूंढ पाएगा या नहीं। भले ही विज्ञान ने आज कई खोज और आविष्कार कर लिया है परंतु माता जी के इस रहस्य को उजागर नहीं कर पाया है| उन पर कई डॉक्टरों ने अपने रिसर्च और अनुसंधान किए परंतु उनके इस रहस्य का पता नहीं लगा पाए।

आशा करता हूं हमारे द्वारा दी गई जानकारी से आप संतुष्ट होंगे। इस लेख का उद्देश्य प्रहलाद जानी के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी प्रदान करना है ताकि लोग जान सके कि मेडिटेशन या ध्यान करने से कितनी शक्ति प्राप्त होती है और इंसान कितना आगे बढ़ सकता है जिस तरह से उन्होंने विज्ञान को चुनौती दिया है वह शायद ही आगे कोई दे पाएगा।