ॐ (ओउम्) की शास्त्रों द्वारा वर्णित इन अदभुद शक्तियों को जान आप भी हो जाएँगे हैरान | Why Om is Powerful

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“गोपथ ब्राम्हण” के अनुसार किसी मंत्र का उच्चारण करते समय यदि उसके प्रारम्भ में ॐ न लगाया जाए तो मंत्र जप निष्फल हो जाता है | मंत्र के आरम्भ में ॐ लगा देने से मंत्रोच्चारण से प्राप्त होने वाली शक्ति कई गुना बढ़ जाती है | ‘ॐ’ शिव रूप है और ‘मंत्र’ शक्ति रूप है | इस प्रकार इन दोनों का उच्चारण करने से सहज ही सिद्धि प्राप्त हो जाती है |

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“माण्डुक्य उपनिशद्” में एक श्लोक के द्वारा वर्णन दिया गया है जो इस प्रकार है –

मुंजीत प्रणवे चेतः प्रणवो ब्रम्हा निर्भायाम् |

प्रणवे नित्ययुक्तस्य न भयं विद्यते क्वचित् ||

अर्थात् चित्त को में समाहित करो | निर्भय कारी ब्रम्हापद है | अतः  में समाहित हो जाने वाला पुरुष भय-बाधा से मुक्त हो जाता है |

नाद का मूल स्वरूप ॐकार (ओंकार) माना जाता है | ॐ ही नाद ब्रम्हा है और ॐ ही परबीजाक्षर है | ॐ का पूरा श्रद्धा एवं भक्ति से उच्चारण करना चाहिए | इसके उच्चारण से एक कंपन्न शक्ति उत्पन्न होती है और मन में एकाग्रता, वाणी में मधुरता और पूरे शरीर में स्फूर्ति का संचार होता है | ॐ का उच्चारण सात, ग्यारह, इक्कीस अथवा इक्यावन बार करने से पूर्ण फल की प्राप्ति होती है | सामूहिक रूप से किया हुआ ॐ का उच्चारण अधिक प्रभावशाली होता है |

ॐ के उच्चारण से होने वाले लाभ 

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ॐ के उच्चारण से हमें अनेक प्रकार के लाभ मिलते है जैसे शारीरिक, मानसिक और आत्मिक | इसके उच्चारण से हमें एक आदर्श जीवन जीने की प्रेरणा मिलती है | आइए हम इसके द्वार प्राप्त तीनों शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक लाभ पर प्रकाश डालते है |

१, शारीरिक लाभ – ॐ का उच्चारण करने से हमारा शारीर स्फूर्ति से भर जाता है और तनाव रहित हो जाता है | किसी भी व्यक्ति को जीवन में किसी भी प्रकार का तनाव है तो वह इसका नियमित उच्चारण कर तनाव से मुक्ती पा सकता है साथ-साथ ॐ का उच्चारण उसके शारीर में तनाव से उत्पन्न नकारात्मक द्रव्यों को भी नष्ट कर एक आदर्श एवं शान्ति पूर्ण जीवन प्रदान करता है | ॐ का नियमित उच्चारण करने वाले व्यक्ति को जल्दी वृद्ध अवस्था नहीं आती | इससे ह्रदय एवं खून का प्रवाह संतुलित होता है | जो व्यक्ति इनसोम्निया (नींद न आना ) बिमारी से ग्रस्त रहता है तो उसके लिए ॐ का उच्कारारण एक सर्व श्रेष्ठ औषधि है |

२, मानसिक लाभ – ॐ का उच्चारण क्रोध को शांत कर जीवन में चुनौतियों से लड़ने का अपूर्व साहस प्रदान करता है | मनुष्य प्रक्रति के साथ ताल-मेल बैठा कर एक आदर्श जीवन जी सकता है | व्यक्ति का विवेक एवं ज्ञान बढ़ता है जिससे वह दूसरों के साथ अच्छा व्यवहार कर सबसे अपने संबंध अधिक मधुर बना सकता है | व्यक्ति के अन्दर का सारा भय मिट जाता है और वह हमेशा नविन उमंग के साथ और उर्जावान युक्त हो कर अपने कर्म के प्रति तत्पर रहता है |

३, ॐ का उच्चारण नियमित कर व्यक्ति ईश्वर की अनुभूति कर उनके और समीप पहुँच सकता है | इससे यह स्पष्ट रूप से समझ में आजाता है कि कैसे ईश्वर हमारे साथ हर क्षण है और हमे उनका संरक्षण प्राप्त है | व्यक्ति सभी प्रकार के भय जहाँ तक की म्रत्यु के भय से भी मुक्त हो जाता है और ईश्वर की शरण में अपनाप को दे देता है |

ॐ से जुड़े वैज्ञानिक तथ्य 

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ॐ के बारे में अनेक वैज्ञानिक अनुसंधान किये जा चुके है | वैज्ञानिकों की माने तो मानव के मस्तिष्क में स्थित कई अंगों में योगासन और व्यायाम द्वारा खिंचाव नहीं लाया जा सकता है ऐसी स्थिति में इन अंगो के लिए ॐ का उच्चारण अत्यंत उपयोगी है | ॐ के उच्चारण से मस्तिष्क के दोनों अर्धव्रत्तों में जो कंपन्न तरंगे उत्पन्न होती है उनसे कैल्सियम कार्बोनेट का जमाव समाप्त हो जाता है | ॐ की इन्ही विशेषताओं को देखते हुए धर्म-शास्त्रों में इसका अत्यधिक महत्व है |                                                                                                                                                                                                                                          नीचे दिए विडियो को देख कर जाने कि किस तरह अपनी राशि अनुसार पहने रुद्राक्ष और हो जाएं मालामाल