नवरात्रि के चौथे दिन होती है माँ कूष्मांडा की पूजा, इस तरह है इनकी पूजा विधि एवं महत्व

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माँ दुर्गा के स्वरुप माँ कूष्मांडा की पूजन विधि

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नवरात्रि में इस दिन भी रोज की ही भांति सबसे पहले कलश की पूजा कर माता कूष्मांडा को नमन करें । इस दिन पूजा में बैठने के लिए हरे रंग के आसन का प्रयोग करना बेहतर होता है । माँ कूष्मांडा को इस निवेदन के साथ जल-पुष्प अर्पित करें कि, उनके आशीर्वाद से आपका और आपके स्वजनों का स्वास्थ्य अच्छा रहे । अगर आपके घर में कोई लंबे समय से बीमार है तो इस दिन माँ से खास निवेदन कर उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना करनी चाहिए । देवी को पूरे मन से फूल, धूप, गंध, भोग चढ़ाएँ । माँ कूष्मांडा को विविध प्रकार के फलों का भोग अपनी क्षमतानुसार लगाएँ। पूजा के बाद अपने से बड़ों को प्रणाम कर प्रसाद वितरित करें ।

माँ की उपासना का मंत्र

सुरासम्पूर्णकलशं रूधिराप्लुतमेव च | 
दधाना हस्तपद्माभ्याम कुष्मांडा शुभदास्तु मे ||

माँ कुष्मांडा की पूजा का महत्त्व

माँ कूष्माण्डा की उपासना मनुष्य को आधियों-व्याधियों से सर्वथा विमुक्त कर उसे सुख, समृद्धि और उन्नति की ओर ले जाने वाली है। अतः अपनी लौकिक, पारलौकिक उन्नति चाहने वालों को माँ की उपासना में सदैव तत्पर रहना चाहिए | माँ कूष्मांडा की उपासना करने से सारे कष्ट और बीमारियां दूर हो जाती हैं । इनकी उपासना से जीवन के सारे शोक खत्म हो जाते हैं । इससे भक्तों को आयु, यश, बल और आरोग्य और संतान सुख की प्राप्ति होती है। देवी मां के आशीर्वाद से सभी भौतिक और आध्यात्मिक सुख भी हासिल होते हैं।

माँ आप सबको जीवन में सुख, शांति एवं सम्रद्धि प्रदान करे |

जय माता दी || 

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