नवरात्रि से सम्बंधित दैवीय शक्तियों का महत्व एवं वैज्ञानिक तथ्य |

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नवरात्रि के त्यौहार से जुड़े धार्मिक एवं वैज्ञानिक तथ्य |

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आपको यह जानकार आश्चर्य होगा कि नवरात्री एकमात्र हिन्दू त्यौहार है जो साल में दो बार मनाया जाता है (वैसे नवरात्रि वर्ष में चार बार आती है)। पौषचैत्र,आषाढ,अश्विन प्रतिपदा से नवमी तक मनाई जाती है) ; चैत्र नवरात्र और शारदीय नवरात्र | चैत्र मास शुक्ल पक्ष में पहली तारीख़ से जो व्रत रखे जाते हैं वो चैत्र नवरात्र कहलाते हैं और आश्विन मास शुक्ल पक्ष में पहली तारीख़ से जो व्रत रखे जाते हैं वो शारदीय नवरात्र | आज हम बात करेंगे शारदीय नवरात्र की | शारदीय नवरात्र के दसवें दिन विजयादशमी मनायी जाती है | ऐसा माना जाता है की शारदीय नवरात्रों की पूजा प्रभु श्री राम ने आरम्भ की थी | सर्वप्रथम श्रीरामचंद्रजी ने इस शारदीय नवरात्रि पूजा का प्रारंभ समुद्र तट पर किया था और उसके बाद दसवें दिन लंका विजय के लिए प्रस्थान किया और विजय प्राप्त की। तब से  शक्ति की उपासना का यह पर्व प्रतिपदा से नवमी  तक निश्चित नौ तिथि, नौ नक्षत्र, नौ शक्तियों की नवधा भक्ति के साथ सनातन काल से मनाया जा रहा है। ।

वैसे यह बात सर्वविदित है कि हिन्दू परम्परा में किसी भी उत्सव के मनाने के पीछे न केवल ऐतिहासिक (पौराणिक/आध्यात्मिक ) महत्व होता है बल्कि इससे अधिक महत्वपूर्ण इसके पीछे वैज्ञानिक कारण छुपा होता है | चूँकि प्राचीन भारत के लोग प्रकृति से कहीं अधिक बेहतर ढंग से जुड़े हुए थे, इसलिए उनके हरेक व्रत/त्यौहारों के मनाने के तौर तरीकों में बदलते मौसम, शरीर विज्ञान आदि का विशेष ध्यान रखा गया है | वास्तव में आप ध्यान देंगे तो पाएंगे की दोनों नवरात्री तब मनाई जाती है जब मौसम बदल रहा होता है | गर्मी की शुरुआत पर चैत्र में और शीत की शुरुआत पर आश्विन माह में मनाई जाती है; गर्मी और जाड़े के मौसम में सौर-ऊर्जा हमें सबसे अधिक प्रभावित करती है। क्योंकि फसल पकने, वर्षा जल के लिए बादल संघनित होने, ठंड से राहत देने आदि जैसे जीवन उपयोगी कार्य इस दौरान संपन्न होते हैं। इसलिए पवित्र शक्तियों की आराधना करने के लिए यह समय सबसे अनुकूल माना गया  है।

प्रकृति में बदलाव के कारण हमारे तन-मन और मस्तिष्क में भी बदलाव आते हैं। इसलिए शारीरिक और मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए हम उपवास/व्रत  रखकर शक्ति की पूजा करते हैं। साथ ही भारत में मार्च और अप्रैल व सितम्बर और अक्तूबर में दिन और रात की अवधि लगभग समान होती है | वर्ष के इन दोनों समयों में मौसम में परिवर्तन व सूरज के असर में एक संतुलन बनता है | ये दोनों ही मौसम न तो ज़्यादा सर्द होते हैं न ही ज़्यादा गर्म और तो और इन मौसमों में पूजा/व्रत करने से हमारे शरीर में संतुलित उर्जा का प्रवेश होता है जो हमारी शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है |

नवरात्री के इन 9 दिनों में लोग व्रत करते हैं और इस व्रत के दौरान शरीर को बदलते मौसम के हिसाब से खुद को ढालने का पर्याप्त वक़्त मिल जाया करता है | इन 9 दिनों के उपवास के दौरान हमारी शारीरिक प्रणाली को व्यवस्थित होने का मौका मिलता है, हम अधिक शक्कर व नमक से बचते हैं,ध्यान करते हैं, सकारात्मक उर्जा ग्रहण करते हैं जिससे हमारा आत्मविश्वास बढ़ता है और साथ ही हमें और भी अधिक दृढ़ निश्चयी बनने में मदद मिलती है |

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बस इसी शुभ विचार के साथ aastik.in के अनुयाईयों/पाठकों (followers/readers) को नवरात्रि की शुभकामनायें |

जय माता दी