केदारनाथ को क्यों कहते हैं जागृत महादेव ? केदारनाथ तीर्थ में घटित एक सच्चे भक्त और शिव साक्षात्कार की सत्य कथा (Kedarnath Jyotirlinga Of Lord Shiva)

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Lord Shiva: Supreme God

केदारनाथ की बर्फीली ठण्ड में वह आदमी मंदिर के बहार बैठा शिव का स्मरण कर रहा था, रात होते ही ठण्ड और बढ़ गयी और अब उस जगह पर किसी मनुष्य के लिए एक पल ठहरना भी कठिन था, लेकिन वो बैठा रहा|

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रात में एक अघोरी बाबा समान, एक आदमी उसके पास आया और उसको खाने के लिए खाना दिया और आग भी जलाई| उस अघोरी बाबा ने निर्धन शिव भक्त से कहा की तुम थक गए होगे एक काम करो मेरे पास थोड़ा खाना है, उसे खाकर आराम कर लो मैं आग लगे देता हूँ| शिव भक्त सचमुच बहुत थक चूका था उसने खाना खाया और आग की गर्माहट में उसकी नींद लग गयी|

Dayalu Mahadev: Lord Shiva

दूसरी सुबह जब उसकी नींद खुली तो वह अघोरी बाबा वहां नहीं थे और बर्फ भी साफ़ हो चुकी थी, ऐसा लग रहा था जैसे सर्दियों का मौसम है ही नहीं| उसको आश्चर्य हुआ की केदारनाथ में तो लगातार 6 महीने बर्फ पड़ती है लेकिन अचानक ये क्या हो गया|

कुछ ही देर बाद उसने देखा की मंदिर के पुजारी जी अपने साथियों के साथ मंदिर की ओर चले आ रहे हैं| जब पुजारी जी मंदिर के पास पहुंचे तो शिव भक्त ने बड़ी ही जिज्ञासा से पूछा की “क्या मंदिर के पट आज ही खुल जाएँगे”|

तो पुजारी जी ने कहा की “हां आज 6 महीने की सर्दियों के बाद मंदिर के पट खुलेंगे” पुजारी जी पहले उस भक्त को पहचान भी नहीं पाए|  

ऐसा सुन उस शिव भक्त ने कहा की “6 महीने बाद ! लेकिन आप तो कल ही मंदिर के पट बंद करके गए थे|”

ऐसा सुन पुजारी जी ने अपने दिमाग पर जोर डाला और कहा की “तुम तो वही हो न जो 6 महीने पहले दर्शन के लिए आए थे लेकिन पट बंद होने के कारण दर्शन नहीं कर पाए थे”

तब उस भक्त ने कहा की “पुजारी जी मैं तो कल ही यहाँ आया था और रात में यहीं सोया था और आज आप आ गए 6 महीने कहाँ से हो गए”

तब पुजारी जी को संदेह हुआ और उन्होंने उससे पूछा की बेटा रात में तुम्हारे साथ क्या हुआ था|

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