हर सफल व्यक्ति इस रहस्य को समझता है | Meditation Tips

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जिंदगी एक चुनौती | Meditation Tips in Hindi

ज़िन्दगी में अक्सर हमें परिस्थितियों, भावनाओं, काम और अन्य लोगों द्वारा चुनौतीयां दी जाती हैं | चीज़ों को, जैसा हम चाहते हैं, बनाने के लिए संघर्ष करते हैं और जो नहीं हो पाती हैं उनके साथ रहने की आदत डालने का संघर्ष करते हैं | हम चीज़ों के लिए अपने नजरिये को बदलने का संघर्ष करते हैं और कभी उन लोगों के साथ जीने का, जिनके साथ हमारी बनती नहीं है | इन सब का यही कारण है कि ज़िन्दगी जैसे हमें मिली है, हम वैसी के साथ जीने में कठिनाई महसूस करते हैं और इन्हें बदलने में मुश्किल आने पर हम निराशा, तनाव, गुस्सा और पछतावा महसूस करते हैं और दूसरों को दोष देते हैं या अपने नसीब को या किसी को भी |

अगर सही मायने में देखें तो स्वीकारने का मतलब हर उस चीज़ के साथ “ ठीक है” कहना भी सही नहीं है, जिसे हम पसंद नहीं करते | ऐसा करके हम बस अपने आप को उस बात से अलग करने के लिए मजबूर करते हैं | अभी भी उन भावनाओं को नियंत्रित करने की कोशिश करते हैं | बाहर से चाहे हम ये दिखाएँ कि हमें कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन अन्दर से हम परेशान होते रहते हैं और अंत में अपने आप को नुकसान पहुँचाते हैं |

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स्वीकार का मतलब इन सब फ़र्कों को पूरी तरह से अपनाना है, उस हद तक नहीं जहाँ हम दिखाते हैं की हमने स्वीकार कर लिया है और अन्दर कुछ और भावना होती है बल्कि उस हद तक जहाँ तुम्हारे बाहरी और भीतरी हिस्से में कोई फर्क नहीं हो | इस तरह हमारे अन्दर कोई जबरदस्ती नहीं होती है और हमारी सोच और वास्तविकता में कोई फर्क नहीं होता | इसी को सही मायने में स्वीकारना कहते हैं |

किसी दुसरे के अनुभवों को समझना नामुमकिन है जब तक कि हम खुद उसी अनुभव से ना गुजरें, या यूँ कहें की जब तक हम उनकी ज़िन्दगी का वो हिस्सा ना जियें | आप सेब का स्वाद लोगों के बताने पर नहीं समझ सकते, उसके लिए आपको खुद खाकर देखना होगा | दूसरों के दर्द और मुश्किलें भी वैसे ही हैं, जैसे हम दुनिया के सब इंसानों से अलग एक अनोखे इंसान हैं, वैसे ही हमारे अनुभव भी अनोखे हैं लेकिन एक इंसान की तरह दर्द सहने और दुनिया को महसूस करना का तरीका सबके लिए एक ही है | हम ज़िन्दगी में दूसरों को समझने के लिए संघर्ष इसलिए करते हैं क्योंकि हम अनुभव के कारणों में उलझ जाते हैं ना की उसे उनके नजरिये से समझने की कोशिश करते हैं |

इस समझ के बिना हम अपने आपको सबसे अलग कर लेते हैं और बस अपने ही बारे में सोचते हैं और दुखों से इस तरह चिपक जाते हैं जैसे वो बस हमारे अपने दुःख हैं | हम अपनी इच्छाओं और विचारों पर इस तरह टिक जाते हैं कि वो दुनिया से बिलकुल अलग हैं और उन पर दूसरों के नजरिये समझने की कोशिश नहीं करते और फिर उन्हें थोपने के लिए संघर्ष करते रहते हैं | ऐसा करते हुए हम हार जाते हैं क्योंकि हम वो समझने में नाकाम होते हैं कि क्या सबके बीच समान है और क्या अलग | एक आदमी के अनुभव की बातें अलग हो सकती हैं लेकिन उसे हम कैसे महसूस करते हैं, वो सबके लिए समान है और यही वो सतह है जहाँ स्वीकारने का असली काम होता है |

हम दूसरों के नजरिये और अनुभवों की बुराई में लग जाते हैं, अगर हम सही में चीज़ों को स्वीकारें तो उनकी मुश्किलों और अनुभवों को उनके नजरिये से देखने की कोशिश करते हैं और फिर अपने नजरिये से तुलना कर के समझते हैं की क्या सबके लिए सामान है और
इसी के साथ तनाव, गुस्सा, नाराजगी ये सब स्नेह, समझ, दयालुता से बदले जाते हैं | इस तरह से हम सभी कहीं ना कहीं किसी की ज़िन्दगी का हिस्सा हैं तो साथ में जीने के लिए स्वीकार करना बहुत ज़रूरी है |

इसे कैसे अपनाएँ | How To Meditate

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जब ध्यान में हों तो सिर्फ बैठ कर साँसों पर ध्यान लगाने से ये सब कैसे होगा ? ध्यान में जो भी अनुभव होता है उससे तुम या तो आकर्षित महसूस करोगे या बिलकुल ही घृणित | मान लो कोई दर्द या भाव उत्पन्न हुआ, उसके साथ ही दिमाग में एक लहर उठती है और उसके साथ ही चेतना | हम उस भावना से या तो दूर जाना चाहते हैं या उसे और महसूस करना चाहते हैं | अगर ये कोई दुखद याद है या भावना है तो ज्यादातर हम उससे दूर ही जाना चाहते हैं | कभी-कभी, किसी बात पर गुस्सा आता है तो हम अपने आप को पूरा उसके सुपुर्द कर देते हैं लेकिन उस बात से अपने आप को दूर करते हैं जिसकी वज़ह से हम गुस्सा हैं | और इस तरह दोनों ही मामलों में हम यही लड़ाई लड़ते हैं कि हम में और उस भावना में जीतेगा कौन ?

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अगली बार जब भी कुछ आपके हिसाब से ना हो या कोई तुम्हे नाराज़ करे तो जो भावना उत्पन्न हो उसे ध्यान से महसूस करें |  ऊपर बताई गयी बातों के अनुसार उसे अपनाएँ, अपनी साँसों पर ध्यान दें, अपनी चेतना को उसका हिस्सा बनायें, अपने आप को उसमें खो दें | कोई आप पर गुस्सा हो तो सुनने की कोशिश करें, ध्यान दें उससे आपमें कौन से भाव उत्पन्न हो रहे हैं और उस पर उसी वक़्त ध्यान दें |  आप पाओगे कि आपको गुस्सा आ रहा है और जब आप अपने गुस्से की तड़प को जानोगे, तो आप समझ पाओगे कि सामने वाला उस वक़्त कैसा महसूस रहा है | ऐसा ही सारी भावनाओं के साथ करने पर आप और अच्छी तरह समझने लगोगे कि अलग अलग भावनाओं में लोग कैसा महसूस करते हैं, ऐसे आप उन्हें और अच्छे से संभाल सकते हो | यही है दुनिया की समझ और दूसरों की भावनाओं को समझना और इस तरह आप अपने जीवन को सुखमयी बना सकते है |

तो दोस्तों क्या आपने कभी इस विषय में ध्यान दिया था ? क्या आपने कभी अपने भावनाओं के आधीन हो अपने को नुक्सान पहुँचाया है ? क्या आप इन पर विजय प्राप्त करना चाहते है ? हमे कोमेंट कर जरुर बताएं और इसे ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं ताकि एक आदर्श समाज का निर्माण हो |

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