Kashi Vishwanath Story | काशी नगरी में सेक्स वर्कर क्यों नाचतीं है चिता के सामने

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(Kashi Vishwanath Manikarnika Samshanghat) मणिकर्णिका घाट सभी घाटों मे सबसे पवित्र माने जाना वाला घाट है जो कि गंगा के किनारे उत्तर प्रदेश के वाराणसी मे स्थित है। माना जाता है कि अगर मनुष्य की मृत्यु के बाद उसकी अस्तिया यहाँ विसर्जित की जाए तो उसकी आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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भारतीय रीति रिवाजों के अनुसार मृत्यु एक दरवाज़ा है दूसरे जीवन तक पहुँचने का और दूसरा जीवन उसके पहले कर्मो के अनुसार मिलता है। हिंदुओ का वंशावली का अभिलेख भी वाराणसी मे रखा जाता है। मणिकर्णिका घाट घिरा हुआ है दशाश्वमेध घाट और स्किनदिया घाट से।

Kashi Vishwanath Manikarnika Samshanghat History|मणिकर्णिका समशानघाट का इतिहास

मणिकर्णिका घाट एक सबसे पुराना घाट है वाराणसी मे और इसका वर्णन गुप्ता शिलालेख 5वी शताब्दी मे भी किया गया है। ये बात उस समय की है जब माता सती ने अपना जीवन न्योझावर कर दिया और अपने शरीर को अग्नि मे झोंक दिया था और इसका कारण था राजा दक्ष प्रजापति जो ब्रह्मा जी के पुत्र थे। उन्होंने भगवान शिव को यज्ञ के दौरान भला बुरा कहा था।

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भगवान शिव सती जी के जलते शरीर को हिमालय ले गए और वहा विलाप करने लगे, विष्णु जी ने देखा कि भगवान शिव का दुःख दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है तो भगवान विष्णु ने अपना दिव्य चक्र भेजा और सती जी के शरीर को 51 हिस्सों मे काट दिया जो धरती पर आ गिरे। जिनको एकण्य शक्तिपीठ बोला जाता है। भगवान शिव ने जहाँ जहाँ सती जी के शरीर के हिस्से गिरे वहाँ वहाँ शक्तिपीठ की स्थापना की। मणिकर्णिका घाट पर सती जी का कानों का कुंडल गिरा था। ये है मणिकर्णिका घाट की कथा।


Kashi Vishwanath Manikarnika Samshanghat Importance|मणिकर्णिका घाट का महत्व

हिन्दू पौराणिक कथा हमे ये बताती है कि घाट मनुष्य की मृत्यु के बात उसकी अस्तिया बहा कर उसकी मोक्ष की प्राप्ति के लिए है। कहा जाता है कि भगवान विष्णु ने हज़ारो साल तपस्या की ताकि वो भगवान शिव को प्रसन्न कर सके और उनको मना सके की वो वाराणसी शहर को न तबाह करे जब प्रलय (हर युग का अंत) के दौरान उन्होंने सारे संसार को नष्ट कर दिया था।

कहा जाता है कि विष्णु जी की इच्छा से पहले भगवान शिव और माता पार्वती वाराणसी आये थे। भगवान विष्णु ने उस समय कुंड खोदा था ताकि भगवान शिव और माता पार्वती वहाँ स्नान कर सके। जब भगवान शिव वहाँ स्नान कर रहे थे उस दौरान उनके कान से एक मणि गिर गयी उसके बाद उस जगह का नाम मणिकर्णिका पड़ गया। इसके अलावा एक और कहानी बताई जाती है कि जब भगवान शिव गुस्से मे नृत्य कर रहे थे उस समय उनके कान से एक मणि धरती पर आकर उस कुंड मे गिरी तभी इस मणिकर्णिका घाट की स्थापना हुई।

चिता के सामने क्यों नाचती है सेक्स वर्कर?

जैसा कि हम सब ने सुना हैं कि सती के वियोग मे भगवान शिव ने तांडव किया था लेकिन क्या आपने ये सुना है कि सेक्स वर्कर ने यहाँ महफ़िल सजायी।

बात है चैत्र नवरात्रि के सप्तमी की जब नर्तकियों के पाव के घुंगरू रात भर भिखरते रहे ओर बजते रहे। एक तरफ जहां समसान मे मृत शरीर जल रहे थे और उनके दुःख मे उनके प्रियजन शौक मना रहे थे वही दूसरी ओर इन सेक्स वर्कर के पांव रुकने का नाम नही ले रहे थे। एक तरफ़ चिता की अग्नि की लपटें वहीं दूसरी और तबले की थपा थप। घुंगरू की झनकार मोक्ष की नगरी काशी मे मौत पर भी उत्सव मना रही थी। ये सब हो रहा था चली आ रही पुरानी परंपरा के कारण । इस पंपरा का मौका होता है हर साल होने वालें महासमशान मोहत्सव की आखरी रात को जब ये महफ़िल सजती है।


Kashi Vishwanath Manikarnika Samshanghat Historical Incident |आखिर क्यों होता है ये नृत्य?

काशी मे बहुत से लोंगो के लिए मौत मुक्ति का उत्सव है वहीं दूसरी और मौत से मातम का सैलाब आ जाता है। ये नृत्य देखने को मिलता है चैत्र नवरात्रि की सप्तमी के दिन  महासमशान महोत्सव की आखरी रात को।

महासमशान मे होने वाले इस उत्सव के पीछे एक कहानी है कहा जाता है कि पन्द्रवीं सताब्दी मे राजा मान सिंह जो कि आमेर के राजा थे और अकबर के नवरत्नों मे से एक थे उन्होंने मणिकर्णिका घाट पर भूत भगवान शिव जी जो वाराणसी शहर के आराध्य देव हैं उनके मंदिर का जिउनोधार कराया और इस अवसर पर वो नाच गाने का आयोजन भी करना चाहते थे। परंतु उस वक़्त कोई भी कलाकार उस स्थान पर आने की हिम्मत नही कर सका। उस समय सेक्स वर्कर को बुलाया गया और इन्होंने वहाँ जाकर बेहिजक ठुमके लगाये और तब से यह एक परंपरा बन गयी। अब वाराणसी मे नगर वदूओ को सम्मान मिलता है और हर साल सप्तमी को यहाँ महफ़िल सजती है नाच गाना होता है।


Kashi Vishwanath Manikarnika Samshanghat Myth|सेक्स वर्कर क्यों खुशी से नाचती है यहाँ पर?

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इस समसान घाट पर सजने वाली ये महफ़िल इतनी मशहूर हो गयी है कि अब मुम्बई शहर और कई शहरों से भी सेक्स वर्कर यहाँ आकर नृत्य करती है और ये एक मान्यता बन गयी है कि जो भी सेक्स वर्कर यहाँ बाबा भोलेनाथ के समक्ष नृत्य दिखाएगी या साधना करेगी उसका अगला जन्म सेक्स वर्कर के रूप मे नही होगा । यहाँ आकर नृत्य करना सेक्स वर्कर अपना शौभाग्य समझती है। मोक्ष की नगरी कही जाने वाली वाराणसी बहुत ही धार्मिक स्थान है। यहाँ ये तक माना जाता है कि मृत्य के वक़्त खुद भगवान शिव कानों मे तारक मंत्र सुनाते है जिससे वह व्यक्ति जन्म मरण के चक्र से छुटकारा पा लेता है और इसकी खुशी आप शव ले जाने वाले परिजनों मे देख सकते है जो कि वो कैसे नाचते गाते ढोल नगाड़ों के बीच शव को ले जाते हैं।

चौंक मत जाना

वाराणसी शहर मे मौत पर शौक़ की जगह नाचते गाते है जिसे देख कर आप चौंक जाएंगे। कहा जाता है कि मृत्य के बाद वो इंसान इस जीवन मरण के चक्र से मुक्त हो जाता है क्योंकि भगवान शिव उस व्यक्ति के कान मे तारक मंत्र का जाप करते है। ये सेक्स वर्कर का नाच उस उत्सव मे होने वाला एक मोक्ष प्राप्ति का ज़रिया है जो कि सिर्फऔर सिर्फ भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए ही किया जाता है।

जय! भोलेनाथ

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