इस कारण भगवान गणेश बने प्रथम पूज्य और इनका वाहन हुआ मूसक |

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कैसे बना चूहा गणेश जी का वाहन

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एक बार इंद्र ने सम्हारो में नाचने एवं गाने के लिए क्रौंच नामक गन्धर्व को बुलाया | जब यह क्रौंच नामक गन्धर्व इंद्र सभा में भागते हुए आया तभी धोके से उसका पैर महार्षि वामदेव को लग गया जो उसी सभा में बैठे हुए थे और तभी ऋषि ने क्रोध में उस गन्धर्व को श्राप देदिया कि जाओ तुम चूहा बन जाओगे |

ऋषि के श्राप से उस गन्धर्व का रूपान्तर चूहे में हो गया और वह उसी रूप में पराशर ऋषि के आश्रम में पहुँच गया | उस चूहे ने ऋषि पराशर के आश्रम में अफरा-तफरी मचा दी | उसने पूरे आश्रम का भोजन खा गया और दुसरे अन्य पदार्थो का नाश करने लगा जिसके कारण ऋषि पराशर एवं अन्य आश्रम वासी बहुत परेशान होगये | इतना ही नहीं उस चूहे ने ग्रन्थ और कई पुस्तके भी बर्बाद कर दी | उस चूहे पकड़ने के लिए आश्रम के प्रत्येक व्यक्ति ने अपना पूरा जोर लगा दिया पर सब नाकाम रहे | अंत में ऋषि पराशर ने गणेश जी से प्रार्थना कर उनकी सहायता करने को कहा | मुनि कि प्रार्थना से भगवान गणेश वहां प्रगट हुए और उस चूहे को अपनी युक्ति से जाल में फसा लिए | जाल में फसने के बाद चूहा गणेश जी से उसे छोड़ने कि विनती करने लगा तो गणेश जी उसकी विनती से प्रसन्न होकर उसे वर मांगने को कहे | तब वह गन्धर्व जो कि श्राप के कारण चूहे में रूपांतरित हो गया था गणेश जी से कहता है कि मुझे आप से कोई वरदान नहीं चाहिए बल्कि वरदान तो आप मुझसे मांग सकते हो तभी गणेश जी उसका ऐसा व्यवहार देख क्रोधित न होकर अपने बुद्धिबल का प्रयोग करते हुए उससे बोले ठीक है तो आज से तुम मेरी सवारी बन जाओ और ऐसा कहकर गणेश जी ने उसी वक्त उस चूहे की पीठ पर आसन जमा लिया | इसी प्रकार उस दिन से चूहा भगवान गणेश का वाहन बन गया |