देशी गौ माता की यह चमत्कारी विशेषता बनाएगी आपको स्वस्थ, सुखी एवं धनवान | Benefits of Desi Cow

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स्वस्थ एवं सम्पन्न जीवन का आधार भारतीय गौवंश 

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बन्धुओ,  विश्व के जीवन का आधार भारत है, भारत की आत्मा गाँव है, गाँव का आधार किसान है, किसान का आधार कृषि है, कृषि का आधार भारतीय गौवंश है, जो इस देश का चेतन धन है इस चेतन धन की रक्षा करना हमारा दायित्य है और क़ानूनी दृष्टि से कर्तव्य है।

मनुष्य को जन्म देने वाली जननी माँ गौमाता और भूमिमाता की सेवा करती है।गौमाता अपने ग़ोबर गोमूत्र ,दूध,दही,घृत,से  भूमिमाता और जननी माँ मनुष्यो का पालन पोषण करती है।भूमिमाता मनुष्यो के लिये अनाज,जल,फल,सब्जियों आदि और गौमाता के लिये चारा,घास से पालन पोषण करती है।

जिससे गाँव स्वावलम्बी बनता,जल,जमीन,जंगल,जानवर,जीव, पर्यावरण,स्वास्थ्य,संस्कार और संस्कृति का रक्षण करती है। भारत देश में दूध,दही,की नदियां बहती थी ऐसी कहावत है भारत विश्व गुरु था सोने की चिड़िया कहलाता था। हमारे पूर्वज लोग गोचर,चारागाह के लिये भूमि छोड़ते थे।सड़क मार्ग पर फलदार बृक्ष लगाते थे कुँए आदि बवाते थे।

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लेकिन आज दुर्भाग्य है गाय सड़क पर घूम रही, गोहत्या बढ़ रही है और कृषि बंजर  हो रही। किसान आत्महत्या कर रहा कर्ज में डूबकर पिछले 15 वर्षों में लगभग 3 लाख से ज्यादा किसानों ने आत्महत्या की और 1 करोड़ से ज्यादा किसानों ने खेती छोड़ी है। युवा गाँव से पलायन कर शहरों में जाकर झुग्गी झोपड़ियों में नरकी जीवन जी रहे रोजगार न मिलने से अपराध की घटना बढ़ रही है। और युवा नशीले पदार्थो के आदी हो रहे उनमें जुआ,बीड़ी,शराब,गंजा आदि की लत बढ़ गई है।और बच्चे कुपोषण के शिकार हो रहे ।

शहरीकरण बढ़ रहा जिससे नुकशान बहुत शहर में वायु प्रदूषण के कारण हवा में श्वांस लेना जान लेवा हो रहा है अधिकांश शहरवासी श्वास की बीमारी बढ़ रही रोग ग्रस्त है। जल प्रदूषण के कारण पानी के स्रोत में कई हानिकारक तत्व पाए गये जो स्वास्थ्य के लिये घातक है इसलिये पीने का पानी खरीदकर पीना पड़ता है और लगभग सभी घरों में फ़िल्टर अवश्य मिलेगा।

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खाद्य प्रदूषण भोजन भी जहरीला अनाज,फल,सब्जियों में रासायनिक विष है और जो फल,सब्जियों में चमक दिखती है ताजी लगती है वह रासायनिक रंगों से रंगी होती है जिनके सेवन अनेक रोग उतपन्न होते है।

ध्वनि प्रदूषण शहरों में 24 घण्टा गाड़ियों की आवाज पो पाप चलती है।शोर रहता इतना ध्वनि प्रदूषण से लोगो मानसिक,और कानों से कम सुनने क़ी बीमारी हो रही है।  होल्टिंग विज्ञापन चारो और दिखाई पड़ता है इसमें कई अभद्र चित्र होते जो एक प्रकार का प्रदूषण ही है।पर्यावरण का सर्वनाश आधुनिकता की होड़ में सड़क,मकान आदि के निर्माण के लिये प्राकृतिक सम्पदाओं को नष्ट किया जाता है।

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शहरवासियों का जीवन रोगग्रस्त जीवन , तनावग्रस्त जीवन शैली के कारण अधिकांश शहरवासियों की भीड़ अस्पतालों में लगी रहती है और हर घर में एक अलमारी दवाओं की होगी।  शहरों में जीवनयापन अधिक ख़र्चीला, झूठी शान-शौकत दिखावा शहरों की पहचान बन गई।और व्यक्ति किसी किसी ऋण में जरूर होगा।

आर्थिक एवं सामाजिक विषमता शहरों में अधिक धनवान और अधिक गरीब तो गरीब ही है यह खाई बहुत बड़ी है। साथ सामाजिक समरसता का बड़ा आभाव भी दिखाई देता है।

शहरों में मानवीय व्यवहार का  बड़ा आभाव है।इस भाग दौड़ की जिन्दगी में दया,प्रेम,करुणा जैसे मानवीय व्यवहार का बड़ा आभाव उदा.सुबह ऑफिस की जल्दी में अगर कोई व्यक्ति सड़क पर तकलीफ में पड़ा है तो 99/प्रतिशत लोग उसे देखकर भी अनदेखा कर देंगे ।मदद की बात तो दूर की। शहरों में लोग गो विरोधी ज्यादा है गाय के लिये कोई चारे पानी का कोई प्रबन्ध नही और अगर शहर में गाय रख भी ली तो उसे एक ही खूंटे पर ही बंधा रहना पड़ता या छोड़ दिया जाता जिससे कब दुर्घटना हो जाये यह बड़ी समस्या रहती है।

शहरों में पारिवारिक क्लेश बढ़ रहे ,अशान्ति व् तनाव बढ़ रहे जिससे तलाक की घटनाएं बढ़ रही है।और बूढ़े माँ वाप के लिये दिल में जगह और न घर में उनको वर्ध्दाश्रम में भेज दिया जाता है। इससे मानसिक रोगी बढ़ रहे है।

शहर व्यवस्था में गाँव की अपेक्षा ऊर्जा खपत की गुना अधिक है। शहरीकरण के दुष्परिणाम को समझने से पता चलता है कि गाँव का महत्व क्यों और कितना है। गाँव में प्रदूषण बढ़ रहा है।जल संकट खड़ा हो रहा है।गाँव की उपेक्षा की जा रही और शहरीकरण को बढ़वा दिया जा रहा इन्ही कारणों से गांव में समस्या बढ़ रही है  विदेशी शिक्षा,अंग्रेजी शिक्षा,रासायनिक खेती,अंग्रेजी चिकित्सा,विदेशी दुधारू जर्सी,हॉलस्टीन पशु,विदेशी रासायनिक सौंदर्य प्रसाधन साम्रगी पेट्रोल,डीजल के उपकरणों के प्रचलन के कारण गाय, बैल,सांड, बछिया,बछड़ा की उपयोगिता कम हो गई गौबंश का ज्ञान लुप्त हो गया और आर्थिक दृष्टि से अनुपयोगी समझकर कसाईघर पहुँचा दिया जाता है।

विनाश काले विपरीत बुध्दि हमारी बुध्दि इतनी भ्र्ष्ट हो गई की हमने पहले गौमाता को निकाल दिया कुत्ता रख लिया भूमिमाता बेच दी फैल्ट खरीद लिया और फिर जन्म देने वाली माँ जिसने नौ माह अपने गर्भ में रखा पालन पोषण किया उसको वर्ध्दाश्रम भेज दिया और बाई रख ली।

विनाश का चक्र कुछ इस प्रकार चलता है। सबसे पहले हमने गाय को छोड़ा गाय के बाद हमने कृषि को छोड़ा कृषि के बाद हमने गाँव को छोड़ा और गांव के बाद देश को छोड़ा जहाँ देवता भी जिस भूमि पर जन्म लेने को तरसते है उसको छोड़ने में आज हम अपनी शान समझ बैठे है

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गाय विश्व की माता है गावो विश्वस्य मातरः गाय की महिमा अदुभुत और अध्दितीय है केवल विश्व में गाय हो ऐसा प्राणी है जिसका मल,मल नही मलशोधक है जिसका ग़ोबर गोमूत्र हमारे लिये पूज्यनीय पवित्र ओ बहुउपयोगी है हम मानते है कि ग़ोबर में माता लक्ष्मी का वास है और गोमूत्र में गंगामाता का वास है ऐसी विशेषता किसी प्राणी में नही है स्वयं देवताओं में भी नही है।

भारत के गांव की आत्मा गाय है जिसप्रकार शरीर से आत्मा चली जाये तो शरीर निर्जीव हो जाता है ठीक उसी प्रकार हमारे गाँव से गाय चली गयी तो गांव निर्जीव हो जायेगा। गाय किसी एक सम्प्रदाय या किसी एक भूभाग के लोगो की माँ नही बल्कि सबकी माँ है ।वह सिर्फ मनुष्यों की ही नही बल्कि समस्त जीवजगत व् वनस्पतियों की माँ है।

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प्रभु श्री कृष्ण ने धनोपार्जन के लिये गीता में बताया है कृषि और गोपालन है कृषि के बिना गोपालन और गोपालन के बिना कृषि अधूरी है। जैसे बलराम और श्रीकृष्ण की जोड़ी । बलराम हल चलाते थे(कृषि के जनक)और श्रीकृष्ण गोचराते इसलिये हमारे पूर्वज लोगो गोधन से सम्पत्ति का मूल्यांकन करते थे। और स्वस्थ और सम्पन्नता जीवन में रहती थी। गाँव में उस समय कोई पानी मांगता था तो लोग उसको दूध पिलाते थे। आज वैज्ञानिकों ने तो सिध्द कर दिखया की भारतीय देशी गाय के गौमूत्र में सोना है यह बात सामने आई तो पूरे विश्व में हलचल मच गई।

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वैज्ञानिकों ने सिध्द किया भारतीय देशी गाय के दूध में ए-2 पोटीन तत्व है जो शरीर के लिये अमृत समान है और विदेशी जर्सी आदि के दूध में ए-1 पोटीन तत्व है जो अनेक प्रकार के शरीर में रोग उतपन्न होते है। अपनी देशी गाय के गोमूत्र से कब्ज से लेकर कैंसर तक 108 प्रकार के रोगों का निदान होता है उसके सेवन करने से। इसी औषधीय गुण गोमूत्र में होने से 5 अंतरराष्ट्रीय पेटेंट प्राप्त हुये जिसमें 3 पेटेन्ट मानव स्वास्थ्य में उपयोगिता है और 2 पेटेण्ट कृषि के उपयोगिता सिध्द हुई।

परमाणु वैज्ञानिक डॉ. मेनन मूर्ति ने गाय के आभा मण्डल पर शोध किया जिसमें पाया है कि गाय के शरीर से सकारात्मक ऊर्जा निकलती है ।जो व्यक्ति गाय को स्पर्श करने से वह व्यक्ति की नकारात्मक ऊर्जा खींच कर नष्ट कर देती है। और बताया है गाय एवं पञ्चगव्य में बहुत अधिक मात्र में यह ऊर्जा होती है। इसलिये हमारे यहाँ घरों में पहली रोटी गाय की गौग्रास के रूपमें माता खिलाती है और प्रणाम करके परिक्रमा करती थी।इससे अनेक रोग नष्ट होते और विशेषता मानसिक रोग में बहुत लाभ है।

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देशी गाय के ऊपर हाथ फेरने से ब्लडप्रेसर बीपी  बढ़ा हो या कम हो वह मात्र 10 से 15 मिनट फेरने से सामान्य होता है। किसी व्यक्ति को पुराना चर्म रोग हो ऐसे व्यक्ति को जहाँ गाय ग़ोबर गोमूत्र गिराती उस स्थान की मिट्टी से स्नान करो गोमूत्र लगाओ बहुत जल्द आराम हो जायेगा। इसलिये कहा गया समस्याएं अनेक समाधान एक हमारी प्रिय गौमाता।

उदा.  ऋषि वशिष्ठ के पासएक गाय थी।कामधेनु एक दिन महाराज विश्वामित्र अपनी विशाल सेना के साथ तपोवन के रास्ते जा रहे थे ।तब ही ऋषि वशिष्ठ ने देखा और महाराजा विश्वामित्र को रोक कर उनका आतित्थ किया।यानि उनकी गाय की कृपा से महाराजा विश्वामित्र की सारी सेना दूध पीकर सन्तुष्ट हुई।विश्वामित्र गाय की महिमा और चमत्कार देखकर उन्होंने ऋषि वशिष्ठ से गाय मांगना उन्होंने अस्वीकार कर दिया।इस पर लड़ाई छिड़ गई  गौमाता की कृपा विश्वामित्र परास्त हुये। इसलिये स्वस्थ्य और सम्पन्नता,सम्रद्धि ,स्वावलम्बी  का आधार हमारी गौमाता है इसकी बड़ी महिमा है।

भारतीय देशी गाय की बड़ी महिमा है,महिमा में भी माँ है।गाय हमारे परिवारों की गरिमा है गरिमा में भी माँ है। गाय दिव्यात्मा है दिव्यात्मा में भी माँ है। गाय देवात्मा है देवात्मा में भी माँ हैगाय पुण्यात्मा है पुण्यात्मा में भी माँ है गाय बिश्वात्मा है विश्वात्मा में भी माँ है गाय भगवान की भगवान है अर्थात गाय परमात्मा है परमात्मा में भी माँ है।गाय माँ की उपमा है उपमा में भी माँ है माँ की अनुपमा है अनुपमा में भी माँ है क्योंकि गाय हमारी माँ है गाय का जो आशीष पायेगा वह स्वस्थ और सम्पन्न हो जायेगा।? जय गौमाता

                 जय भारत माता

उमेश चन्द्र पोरवाल केन्द्रीय मंत्री

भारतीय गौवंश रक्षण सवंर्धन परिषद विश्व हिंदू परिषद

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