अगर आपके घर में बच्चे है तो ये बात जरूर लानलें | Baby Care Tips Hindi

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क्या कुछ कहता है बच्चों का रोना | Baby Care Tips Every Moms Should Know

छोटे-छोटे बच्चों को समझ पाना बहुत ही मुश्किल है खासकर की नवजात शिशुओं को | ऐसा इसलिए क्योंकि, बड़ों की तरह, वे अपनी समस्याएँ, अपनी तकलीफें बोलकर नहीं समझा सकते | ये नवजात शिशु हर दिन कुछ नया अनुभव कर रहे होते हैं – कुछ अच्छा या कुछ बुरा भी | लेकिन इनकी बहुत सी आदतें माँ-बाप को फ़िक्र करने पर मजबूर कर देती है | इन्हीं कई सारी आदतों में से एक आम आदत है.. बच्चों का शाम के समय रोना | आमतौर पर ये देखा गया है कि जैसे-जैसे सूरज ढलने लगता है और शाम होने लगती है, ये छोटे-छोटे बच्चे जोर-जोर से रोना चालू कर देते हैं | माओं के लिए ये जान पाना बड़ा ही मुश्किल हो जाता है की उनकी आँखों का तारा आखिर क्यूँ इतनी आँखें सुजा रहा है | दिन भर में एक ऐसा समय ज़रूर आता है, जब ये नन्हे-मुन्ने फूल बेचैन होने लगते हैं और दहाड़े मार के रोने लगते हैं | आपने भी अक्सर महसूस किया होगा की शाम से लेकर रात तक के समय के बीच में ये शिशु ज्यादा शोर करते हैं | क्यों रोते हैं नवजात शिशु इस समय ? आइये जानते हैं इसके पीछे की वजह और क्या है इस समस्या का समाधान….?

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बाहर निकलने का होता है मन

जैसे की हम बड़े लोग दिन भर किसी एक जगह पर टिककर नहीं बैठ सकते ठीक और जिस तरह हमें भी बदलाव की, खासकर शाम के समय खुली हवा की ज़रुरत महसूस होती है ठीक वैसा ही कुछ हमारे इन नन्हे-मुन्ने फूलों के साथ भी होता है | आप स्वयं सोच कर देखिये कि पूरे दिन एक बच्चा घर पर रहता है तो उसको भी तो खुली हवा की ज़रुरत महसूस होती होगी | बस यही कारण है कि ये नवजात शिशु सारा दिन घर पर रहकर बेचैन हो जाते हैं और फिर रोने लगते हैं | इसीलिए ये बेहद आवश्यक है कि आप अपने लाडले को हर दिन थोडा बाहर की खुली हवा में घुमाएँ (खासकर की शाम को) | आप देखेंगे की आपके बच्चे के चेहरे की मुस्कान लौट आई है |

जब बदलाव होता है दिनचर्या में

जैसा की हम ऊपर लिख चुके हैं कि, हर दिन शाम के वक़्त थोड़ी देर अपने बच्चे को घुमाने का नियम बना लें | लेकिन अगर आप ऐसा कर रहे हैं तो इसे हमेशा जारी रखें, क्यूंकि जिस दिन भी आप use बाहर लेकर नहीं जायेंगे आपके लाडले को ये महसूस होने लगेगा और वे ठीक उसी वक़्त रोने लगेगा, जब शाम को उसका बाहर निकलने का समय होता है | इसलिए यदि बरसात का मौसम हो या किसी अन्य दिन भी मौसम खराब हो या किसी और भी वजह से यदि आप बाहर नहीं जा पा रहे तो इस बात का ध्यान रखें कि उस दिन आप घर पर ही बच्चे को गोद में लेकर घुमायें या उसके साथ थोड़ी देर खेल लें – आपके बच्चे को अच्छा लगेगा |

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अगर भूख लगे 

जैसे शाम को हम लोगों को हलकी-सी भूख लगती और हमारा चाय-कॉफ़ी या कुछ snacks खाने का मन होता है ठीक वैसे ही उनको भी शाम के समय भूख लगती है | इसलिए अपने प्यारे से बच्चे को थोड़े-थोड़े interval में स्तनपान (breastfeeding)अवश्य कराएँ |

कोई शारीरिक तकलीफ़(physical problem) होने पर

कभी-कभार ऐसा भी होता है कि बच्चा बाहर घूमने के बाद और स्तनपान करने के बाद भी बहुत रोता है | अगर आपका दुलारा भी कुछ ऐसा ही कर रहा है तो हो सकता है की use कोई शारीरिक परेशानी हो जैसे पेट में दर्द, fever, या अन्य कोई दूसरी परेशानी हो | अगर ऐसा है आप जल्द से जल्द पता लगायें और हो तो तुरंत ही डॉक्टर को दिखाएँ |

मौसम के कारण

कभी-कभी ऐसा भी होता है कि बच्चे ज़्यादा गर्मी या ठण्ड लगने की वजह से भी रोने लगते हैं | ऐसा इसलिए होता है क्यूंकि शाम से रात के बीच के समय में ही मौसम में व्यापक बदलाव आते हैं | हो सकता है की आपके सुकुमार की कोमल त्वचा या शरीर उस बदलाव को सहन नहीं कर पा रहे हों और इसीलिए वे रो रहें हों |

क्या है समाधान ? Baby Care Tips In  Hindi

1, सबसे पहले आप अपने बच्चे को शाम को बाहर की खुली हवा महसूस कराएँ और घुमाने लेकर जाएँ |

2, यदि किसी भी वजह से आप अपने लाडले को बाहर नहीं ले जा पा रहें हो तो शाम को उसका मन बहलायें, उसके साथ खेलें |

3, अपने नन्हे राजकुमार का डायपर चेक करते रहें क्योंकि डायपर में रैशेज़ आने पर या गीला हो जाने पर use दिक्कत महसूस होने लगती है और वो रोना शुरू कर देता है |

4, चूँकि शाम के वक़्त बच्चों को भी भूख लगती है इसलिए उसे स्तनपान अवश्य कराएँ |

5, अपने नन्हे-मुन्ने का ध्यान रखें और उसे हर थोड़ी-थोड़ी देर में छूकर अवश्य देखें क्योंकि बच्चों को कभी-कभी बुखार होता है, या ज़्यादा ठंडा या गर्म लगने से भी वे बेचैन हो जाते हैं और रोना शुरू कर देते हैं और देर तक रोने लगते हैं |

हम दावा करते हैं की अगर आप इन छोटी-छोटी बातों का का ध्यान रखेंगी तो आप अपने लाडले के शाम के समय रोने की वजह को बहुत हद तक समझ भी पाएंगी और उसका उपाय भी कर पाएंगी | इन सबके अलावा सब्र से काम लें और फ़िक्र ना करें क्यूंकि हर बच्चे का अपना एक अलग अंदाज़ होता है। हो सकता है आपका दुलारा दूसरों के बच्चों की तरह शाम को ना रोता हो इसके बजाये रात को या दिन में रोता हो इसलिए इसमें घबराने की बात बिलकुल भी नहीं है ज़रूरत है तो थोड़ी ज़्यादा ध्यान देने की |

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