क्यों मृत्यु के बाद की जाती है कपाल क्रिया एवं जानिए अंतिम संस्कार से जुड़े यह रहस्य

0
6424

antim-sanskar-hindi

यजुर्वेद में आत्मा का शारीर से निकल जाने के संबंध में कुच्छ इस तरह प्रकाश डाला गया है |

वायुरनिलम मृत माथेदं भस्मान्तं शरीरम् |

ओम् क्रतो स्मर क्लिवे स्मर कृतं स्मर ||

अर्थात हे कर्मशील जीव ! तू शारीर के बंधन से मुक्त होते समय परमात्मा के श्रेष्ठ और सर्वोत्तम नाम ‘ओम्’ का स्मरण कर | ईश्वर का स्मरण करते हुए अपने कर्मो को याद कर | शारीर में आवागमन करने वाली वायु अमृत है, किन्तु यह नश्वर शारीर भस्म होने के लिए है, भस्म स नष्ट होने वाला है और भस्म के योग्य है |

antim-sanskar-hindi

चूड़ामनोपनिषद के अनुसार तो यह बताया गया है कि प्रकाश स्वरूप आत्मा की उत्पत्ति तो स्वयं ब्रम्हा से हुई है | आत्मा से आकाश, आकाश से वायु, वायु से अग्नि, अग्नि से जल और जल से पृथ्वी का प्रादुर्भाव हुआ है | इन्ही पंच तत्वों से मानव शारीर की रचना हुई है | हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार किये जाने वाले अंत्येष्टि (अंतिम) संस्कार के दौरान मृत शारीर को अग्नि के सुपुर्द करके आकाश, वायु, जल अग्नि और भूमि नाम के इन्ही पंच तत्वों में विलीन कर दिया जाता है |

antim-sanskar-hindi

अथर्ववेद में एक श्लोक के माध्यम से अंत्येष्टि संस्कार पर प्रकाश डालते हुए कहा गया है कि –

आरभस्व जातवेदस्तेजस्वद् हरो अस्तु ते |

शारीरमस्य सदं हाथैनं धेहि सुक्रितामु लोके ||

इसका अर्थ यह है कि हे अग्नि ! तुम इस शव को प्राप्त करो और अपनी शरण में ले लो | तुम्हारे द्वारा किया गया यह शव हरण शुभ हो | टू इस शव को जला दो | हे अग्निरूपी प्रभु ! इस जीवात्मा को तुम सुक्रतलोक में धारण करो |

कपाल क्रिया से जुड़ा रहस्य जानने के लिए नीचे नेक्स्ट बटन पर क्लिक करें |

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here