कुछ इस तरह है नाग पंचमी की पूजा और पौराणिक कथा का चमत्कार |

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nag panchami

भारत देश जो कि विभिन्न प्रकार की संस्कृति एवं रीती-रिवाजों के रंगों से रंगा हुआ है यहाँ पर विभिन्न जाती और समुदाय के लोग न केवल निवास करते है बल्कि एक-दुसरे के साथ मिलजुलकर पर्व एवं त्यौहार भी मनाते है | जैसा कि हम सब जानते है भारत देश को त्यौहारों का देश भी कहा जाता है और इसके अनेक महत्वपूर्ण त्यौहारों में से एक नाग पंचमी का त्यौहार है | नाग पंचमी का त्यौहार श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है | नाग पंचमी त्यौहार के शुभ अवसर पर नाग देवताओं की पूजा की जाती है | मान्यताओं के अनुसार इस दिन नाग (सर्प) को दूध पिलाया जाता है | इस दिन भारत के कई ग्रामीण क्षेत्रों में मेला भी लगाया जाता है | हिन्दू मान्यताओं के अनुसार इस नाग पंचमी के त्यौहार से जुडी कई पौराणिक कथाएँ है और इस दिन विधि पूर्वक पूजा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है | तो आएये देखते है कि क्या है यह रोचक कथाएँ और पूजा विधि जिसके द्वारा आप अपने त्यौहार को सम्पूर्ण कर सकते है |

पहली कथा: जब नाग ने निभाया एक भाई का कर्तव्य:

एक धनि सेठ के दो बेटे और बहुएं थी | उसकी जो छोटी बहु थी वह हमेशा उदास रहती थी क्यों कि उसका कोई भाई नहीं था और उसे हमेशा से एक भाई की चाह थी | एक बार की बात जब घर का चबूतरा लीपने के लिए उसकी दोनों बहुएं खेत में मिट्टी लेने गयी | जब वह दोनों खेत में मिट्टी खोद रही थी तभी वहा एक सर्प निकला और जैसे ही दोनों की नजर उसपर पड़ी तो बड़ी बहु ने उसको मारने की कोशिश की तभी छोटी बहु ने उसे रोका और कहा की उसे मत मारो तभी यह सुनकर बड़ी बहु रुक गयी | फिर दोनों जब घर लौटने लगी तो छोटी बहु ने सर्प से लौटने का वादा किया और चली गयी |

एक दिन बीतने के बाद उसे अपना वादा याद आया जो उसने सर्प से किया हुआ था और उसे एहसास हुआ कि कामकाज में व्यस्त होने के कारण वह उसके पास जाना भूल गयी | फिर क्या था वह तुरंत दौड़ कर वहा गयी और देखा की वह सर्प उसका वहीँ इंतजार कर रहा था | उसने बोला सर्प भैया प्रणाम, यह सुनकर सर्प ने कहा की आज से में तुम्हे अपनी बहन स्वीकार करता हूँ और तुम्हारी जो भी इक्षा होगी में पूर्ण करूँगा, ऐसा कह कर वह चला जाता है | कुछ समय बाद वह सर्प सेठ  घर जाकर कहता है की में इसके दूर का भाई हूँ और इसे मायके लेजाने आया हूँ तो घर वालो ने भी हाँ कर दी | जब वह वापस आ रही थी तब सर्प भाई ने अपनी बहन को बहुत सारे गहने और स्वर्ण दिए | इस बारे में खबर नगर के राजा तक पहुच गयी उसने सेठ की छोटी बहु को दरबार में पाश करने को कहा | जब वह आयी और राजा ने वह गहने देखा तभी रानी को उसका एक हार पसंद आगया और जैसे ही रानी ने उससे लेकर उस हार को पहना तो वह सर्प बन गया | यह देख राजा बहुत क्रोधित हुआ पर जब सेठ की छोटी बहु ने उसे पूरी घटना की जान्काती दी तो फिर राजा का क्रोध शांत हुआ और उसे उसने जाने दिया | जिस दिन छोटी बहु ने बड़ी बहु को रोक कर सर्प की जान बचाई थी उस दिन शुक्ल पक्ष की पंचमी थी इसीलिए उस दिन से आज तक इस तिथि में यह नाग पंचमी त्यौहार मनाने की परम्परा चली आ रही है |

दूसरी कथा: सर्प पूजा से हुई संतान की प्राप्ती:

एक राजा के सात पुत्र थे जिसमे से छः पुत्रों के घर तो संतान ने जन्म लेलिया था पर उसका जो सबसे छोटा पुत्र था उसके कोई संतान नहीं थी | वैसे तो उसका छोटा पुत्र और उसकी पत्नी बहुत ही धार्मिक प्रवत्ति के थे वह यह जानते थे की संतान का होना या न होना तो भगवान् के हाथ में है पर फिर भी उन्हें संतान न होने के कारण परिवार और समाज के ताने सुनने पड़ते थे | जैसे-जैसे समय बीत रहा था पर उन्हें यह विश्वास था की ईश्वर इस समस्या का समाधान अवश्य करेगा | एक रात राजा के उसी बहु के सपने में पांच सर्प आये और उसे कहा कि तुम संतान के लिए चिंतित क्यों हो, तुम हमारी पूजा करो विधि पूर्वक हम तुम्हारी मनोकामना पूर्ण करेंगे | वह जैसे ही सबेरे उठी उसके सपने की बात अपने पति को बतायी तो उसके पति ने कहा जैसा कहा है वैसा विधि पूर्वक करो | उसने फिर विधिपूर्वक उन सर्पो की पूजा की जिसके फल स्वरुप बहुत जल्द उसको संतान संतान का सुख प्राप्त हुआ | कहा जाता है कि जिस दिन राजा की छोटी बहु को पांच सर्पो ने स्वप्न में दर्शन दिया था उस दिन शुक्ल पक्ष की पंचमी थी तभी से इस दिन नागों की पूजा करने की प्रथा बन गयी और यह त्यौहार नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है |

नाग पंचमी की पूजा विधि:

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नाग पंचमी के दौरान सभी लोग सर्पों की पूजा विभिन्न तौर-तरीको से करते है उनमे से कुछ महत्वपूर्ण इस प्रकार है :-

१, सूर्योदय के पूर्व उठकर स्नान आदि कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें |

२, इस दिन अलग-अलग लोग अपने घरों में अपने रीती-रिवाजों के अनुसार भोग लगाते है | जैसे किसी के घर खीर और पूड़ी बनती है तो किसी के घर दाल बाटी | कई लोगो के अनुसार तो इस दिन चावल न बनाने की मान्यता है तो कोई इस दिन अपने घरों में चूल्हा ही नहीं चढ़ाता है |

३, इस दिन लोग अपने घर के प्रमुख द्वार में या फिर रसोई घर की दिवार में गेरू के पत्थर लेप कर उसे शुद्ध करते है और फिर वहीँ छोटे से स्थान पर डिब्बा बनाकर उसमे सर्पो की आकृति बनाते है और उनकी पूजा करते है  |

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४, इसके बाद लोग अपने घर में सपेरे को बुलाकर उनके पास जो टोकरी में सर्प होता है उसे पुष्प, कुमकुम, अक्षत और दूध का भोग लगाते है और उसकी पूजा करते है |

५, सर्पों को दूध पिलाना अति उत्तम माना गया है |

६, इसके बाद सपेरे को दान-दक्षिणा देकर प्रसन्न पूर्वक विदा किया जाता है |

७, कुछ लोगों का यह भी मानना है कि इस पावन नाग पंचमी के त्यौहार में अगर सपेरे को कीमत अदाकर सर्प को मुक्त कराओ तो बहुत शुभ फल की प्राप्ति होती है |

इस प्रकार विधि पूर्वक पूजा करने के उपरान्त सभी परिवार के सदस्य मिलजुल कर भोजन करते है |

क्या आप इस तथ्य के बारे में पहले से जानते थे , कृपया कोमेंट कर हमें बताएं |

 

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